Wednesday, February 8, 2023
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निमोनिया से हर दो धंटे में थम रही एक बच्चे की सांसें

जबलपुर। प्रदेश में निमोनिया बच्चों की मौत का एक नया कारण बन गया है। दरअसल, इस बीमारी से हर दो घंटे में एक बच्चे की सांसें थम रही हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 के बीच किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है। तीन दिन पहले जारी की गई सर्वे रिपेार्ट के मुताबिक, निमोनिया सेह र साल 13 हजार 29 बच्चों की मौत होती है। इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 18 जुलाई से प्रदेश भर में दस्तक अभियान चलाया जाएगा। निमोनिया के अलावा सर्वे में बच्चों को होने वाली सामान्य बीमारी डायरिया, कुपोषण आदि शामिल रहेगी। जबलपुर मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अच्युक्त अग्रवाल के मुताबिक निमोनिया फेंफड़ों का संक्रमण है, जो बैक्टीरिया, वायरस और फंगल इंफेक्शन के जरिए बच्चों के शरीर में पहुंचता है। यह बीमारी होने से बच्चों को सांस लेने में अधिक परेशानी होती है।

आशा कार्यकर्ता अब घर-घर देंगी दस्तक – जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. एसएस दाहिया के मुताबिक शहर में 18 जुलाई से दस्तक अभियान शुरु हो रहा है। इसमें आशा कार्यकर्ताओं के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर बच्चों में निमोनिया, डायरिया, एनीमिया, कुपोषण, सर्दी, खांसी की जांच करेगी। 31 अगस्त तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान में शहर केक पांच साल तक के करीब चार से पाँच लाख बच्चों को सर्वे में शामिल किया जाएगा। जांच में यदि कोई बच्चा बीमारी से पीडि़त होता है तो उसको नजदकीक अस्पताल रेफर किया जाएगा। संक्रमण के लक्षण – बुखार तेजी से बढ़ती है। मरीज को थकान व कमजोरी महसूस होना। बलगम वाली खांसी आना। मरीज को बुखार के साथ पसीना आना और कंपकंपनी के साथ बुखार आना प्रमुख रूप से शामिल है। इस बारे में रीजनल डायरेक्टर स्वास्थ्य विभाग डॉ. संजय मिश्रा का कहना है कि मौसम में परिवर्तन से पांच साल तक के बच्चों में निमोनिया सामान्य बीमारी है। लेकिन बीमारी का समय पर इलाज ही उसका एकमात्र उपाय है। इस बीमारी में शहर ही नहीं संभाग के भी कई बच्चे गस्ति होते हैं। समय पर इलाज नहीं शुरु होने से बीमारी का रूप ले लेती है।

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